गृहमंत्री अमित शाह का राज्यसभा में बयान कहा कश्मीर से हटाई जाएगी धारा 370 । धारा 370 क्या है , भारतीय संविधान के अनुच्छेद के तहत कश्मीर को एक विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है , जिसके अनुसार केंद्र सरकार कि कोई भी योजना बिना राज्य सरकार की सहमति से राज्य में लागू नहीं किया सकती और यह अनुच्छेद जम्मू एंड कश्मीर राज्यपाल अपना अलग संविधान बनाने की भी शक्ति देता है यहां के मुख्यमंत्री का पद किस राज्य के लिए प्रधानमंत्री के पद के बराबर होता है अर्थात राजा सरकार की अनुमति के बिना कश्मीर में केंद्र सरकार की कोई भी योजना लागू नहीं की जा सकती है धारा 370 कश्मीर को अपना अलग झंडा रखने की भी अनुमति देती है । संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर राज्य में आंतरिक कलह के नाम पर आपातकालीन स्थिति की घोषणा नहीं की जा सकती है और ना ही यहां पर केंद्र सरकार बिना राज्य सरकार की अनुमति के भारत की सशस्त्र सीमा और को भेज सकती है, जम्मू एंड कश्मीर राज्य में सशस्त्र बलों की तैनाती अफस्पा एक्ट के तहत की जाती है ।
ब्रिटिशकालीन आयोग व समितियां- ब्रिटिश काल में बने प्रमुख आयोग समितियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी इस आर्टिकल में प्रदान की गई है, इस आर्टिकल में आज हम बात करेंगे ब्रिटिश काल में बने 30 प्रमुख आयोग व समितियों के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं- 1. इनाम आयोग- इनाम आयोग की स्थापना 1852 में की गई थी, इसके अध्यक्ष इनाम थे, उस समय भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी थे। इनाम आयोग का उद्देश्य भूमि संबंधी विवेचना था। 2. दुर्भिक्ष आयोग(I)-दुर्भिक्ष आयोग की स्थापना 1880 में की गई थी दुर्भिक्ष आयोग के अध्यक्ष रिचर्ड स्ट्रेची थे, इस समय भारत के वॉयसराय लॉर्ड लिटन थे, दुर्भिक्ष आयोग का उद्देश्य अकाल निवारण पर विचार करना था, 3.हण्टर आयोग- हंटर आयोग की स्थापना 1882 में की गई थी, इसके अध्यक्ष विलियम हंटर थे, हंटर आयोग की स्थापना के समय भारत के वॉयसराय लॉर्ड रिपन थे, इस आयोग का उद्देश्य शिक्षा का विकास था। 4. एचिंसन आयोग-एचिसंन आयोग का गठन 1886 मैं किया गया था, इसके अध्यक्ष चार्ल्स एचिसंन थे,जिसमें एचिसंन आयोग बना उस समय भारत के वॉयसराय लॉर्ड डफरिन थे,एचिंसन आयोग का उद्देश्य नागरिक सेवा में भारतीयों की...
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